● सरदार पटेल का दृष्टिकोण संतुलित, व्यावहारिक और उदार था। उनके लिए अर्थशास्त्र एक “गहन व्यावहारिक विज्ञान” था। कीमतों में अस्थायी रुकावटें या कृत्रिम कटौती या निवेश की उत्तेजना में कमी और मनमानी नीतियां उन्हें स्वीकार्य नहीं थीं। वह चाहते थे कि भारतीय अर्थव्यवस्था उत्पादन, औद्योगिक और कृषि की https://keegan46ad3.review-blogger.com/42256682/how-much-you-need-to-expect-you-ll-pay-for-a-good-सरद-र-पट-ल-क-ब-र-म-द-लचस-प-ब-त